
कुछ महीनों से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे Gold-Silver में अब जोरदार गिरावट देखने को मिली है। जनवरी के आखिर में जहां सोना ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹4 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई थी, वहीं फरवरी की शुरुआत होते-होते दोनों कीमती धातुओं में ऐतिहासिक बिकवाली दर्ज की गई।
MCX पर भारी गिरावट, Gold-Silver एक ही दिन में 9% लुढ़के:
ओवरसीज मार्केट में तेज गिरावट का असर भारत के कमोडिटी बाजार पर भी साफ दिखा। रविवार, 1 फरवरी को MCX पर सोना और चांदी करीब 9% की भारी गिरावट के साथ खुले। मौजूदा स्तरों पर सोना करीब ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग ₹2.74 लाख प्रति किलो के आसपास ट्रेड करती नजर आई। इतनी तेज गिरावट ने बीते कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और बाजार में डर का माहौल बना दिया है।
Gold-Silver Crash की 5 सबसे बड़ी वजहें:
इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला कारण है रिकॉर्ड स्तरों पर मुनाफावसूली, जहां बड़े निवेशकों ने एक साथ बिकवाली शुरू कर दी। दूसरा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जिससे बिना ब्याज वाले एसेट जैसे गोल्ड-सिल्वर की चमक फीकी पड़ी। तीसरा, फेडरल रिजर्व की सख्त नीति की आशंका, जिसने ब्याज दर कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया।
चांदी में सबसे ज्यादा टूटी , एक हफ्ते में ₹1,34,400 तक:
सोने के मुकाबले चांदी में गिरावट कहीं ज्यादा तेज और डरावनी रही है। सिर्फ एक हफ्ते में चांदी अपने पीक से करीब ₹1,34,400 प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है। ग्लोबल मार्केट में तो चांदी एक दिन में 27% से ज्यादा फिसली, जबकि इंट्रा-डे में 36% तक की गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चांदी हाल ही में काफी ओवरबॉट थी, इसलिए इसमें करेक्शन ज्यादा गहरा हुआ।
खरीदें या बेचें? Gold-Silver :
इस गिरावट को लेकर बाजार के जानकारों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने के लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स अब भी मजबूत हैं और यह गिरावट लंबे निवेशकों के लिए मौका बन सकती है। वहीं, चांदी को लेकर रुख ज्यादा सतर्क है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें अभी और गिरावट संभव है, इसलिए जल्दबाजी में खरीदारी से बचना बेहतर होगा।
WhiteOak Capital की चेतावनी: चांदी में पहले मुनाफा बुक:
WhiteOak Capital Mutual Fund ने अपनी रिपोर्ट “Gold is Talking, Silver is Screaming” में चांदी को लेकर सख्त चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब Gold-Silver से कहीं ज्यादा तेजी दिखाती है, तो यह अक्सर सट्टेबाजी के चरम का संकेत होता है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो का 46:1 तक आ जाना भी चांदी के लिए खतरे का संकेत माना गया है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट को ट्रेंड रिवर्सल नहीं बल्कि कंसोलिडेशन माना जा रहा है।Gold-Silver में लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी पर विचार कर सकते हैं, जबकि चांदी में फिलहाल जोखिम ज्यादा नजर आ रहा है। जल्दबाजी की जगह चरणबद्ध निवेश और सही एसेट एलोकेशन ही इस समय सबसे समझदारी भरी रणनीति मानी जा रही है
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1 thought on “Gold-Silver Crash: रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद अचानक क्रैश, निवेशक क्या करें अब?”