MGNREGA भारत में एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसकी स्थापन 5 सितम्बर 2005 को की गई थी । यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है जो प्रतिदिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी राखी गई थी सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘VB G RAM G’ (विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) करने का प्रस्ताव रखा है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ नाम बदलने से ग्रामीण भारत की रोज़गार की तस्वीर भी बदल पाएगी, या ज़मीनी हकीकत वही रहेगी?
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ToggleMGNREGA से बेहतर और आधुनिक योजना:

सरकार कह रही है कि VB–G राम जी योजना मनरेगा की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक है। इस योजना में डिजिटल निगरानी, तेज़ और सुनिश्चित भुगतान प्रणाली, और परिणाम आधारित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे सिर्फ रोजगार देने तक सीमित न रखकर, ग्रामीण विकास और स्थायी आजीविका के लिए भी तैयार किया गया है। सरकार इसे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मान रही है।
मनरेगा से VB G RAM G तक का सफर
MGNREGA की शुरुआत साल 2005 में हुई थी, जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन का रोज़गार देना था। इस योजना से करोड़ों लोगों को काम तो मिला, लेकिन समय के साथ इसमें कम मज़दूरी, भुगतान में देरी और सीमित काम जैसी समस्याएँ भी सामने आईं। अब सरकार का दावा है कि VB G RAM G योजना केवल मज़दूरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थायी आजीविका और कौशल विकास पर भी ध्यान देगी।
सरकार का दावा: सिर्फ काम नहीं, सम्मानजनक रोज़गार
VB G RAM G को लेकर सरकार कह रही है कि यह योजना ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को लंबे समय तक टिकाऊ रोज़गार देने में मदद करेगी। इसमें स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार काम, डिजिटल भुगतान, और गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर ये वादे ज़मीन पर उतरे, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है। जबकि MGNREGA में ऐसा नहीं था I
क्या सच में बदलेगी ग्रामीण रोजगार की तस्वीर?
अगर VB G RAM G में बजट बढ़ाया जाता है, काम के दिन बढ़ते हैं, और मज़दूरी को महंगाई के हिसाब से तय किया जाता है, तो यह योजना MNREGA से बेहतर साबित हो सकती है। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना भी बेहद ज़रूरी होगा, ताकि लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
निष्कर्ष
MNREGA का नाम बदलकर VB G RAM G करना अपने आप में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। असली बदलाव तब होगा, जब नीतियाँ ज़मीन पर सही तरीके से लागू होंगी और ग्रामीण लोगों को स्थायी, सम्मानजनक रोज़गार मिलेगा। अब देखना यह है कि यह योजना सिर्फ एक नया नाम बनकर रह जाती है या सच में ग्रामीण भारत की तक़दीर बदलने का ज़रिया बनती है।
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